सल्ट में पशु प्यापारी के हत्या के मामले में अपर जिला सत्र न्यायधीश अजंलि नौलियाल ने आरोपी सुनील सिंह बिष्ट और वीरेन्द्र कुमार को दोषमुक्त किया,
इस मामले में आरोपी सुनील सिंह बिष्ट की ओर से अधिवक्ता पीसी तिवारी व मनोज कुमार पंत एवं वीरेन्द्र कुमार की ओर से अधिवक्ता महेश चन्द्र व प्रेम राम ने प्रबल पैरवी की।
दलीलों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने उक्त फैसला सुनाया।
अधिवक्ता पीसी तिवारी, मनोज पंत, महेश चंद्र और प्रेम राम ने बताया कि 9 दिसंबर 2022 को मोहम्मद कफील ने अपने मामा अजीबुर्रहमान की गुमशुदगी की रिपोर्ट राजस्व उपनीरिक्षक उदयपुर, भिकियासैंण अल्मोड़ा में दर्ज की, जिसमें कहा कि उनके मामा एक पशुव्यापारी है जो ग्राम भाकुड़ा, तहसील स्याल्दे जिला अल्मोड़ा में किराए के मकान में रहते हैं जो 6 दिसंबर 2022 दिन में 1 बजे से लापता है।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद 9 दिसंबर 2022 को पटवारी ,मुहम्मद कफील व अन्य द्वारा खोजबीन की गई तो जड़पानी के गधेरे में मृतक का जूता और आगे बढ़े तो एक दीवार पत्थर से चिनी हुई थी, दीवार को हटा देखा गया तो वहाँ रिपोर्टकर्ता के मामा की लाश मिली, तब तुरन्त पटवारी उदयपुर को सूचित किया गया उन्होंने मृतक के लाश की पंचनामा की कार्यवाही कर पोस्टमार्टम के लिए भिकियासैंण ले गए, पोस्टमार्टम के उपरान्त लाश को रिपोर्टकर्ता एवं उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया ।
13 दिसंबर 2022 को मामले की विवेचना रेगुलर पुलिस को स्थानान्तरित की गई। पुलिस विवेचना के दौरान आरोपी सुनील सिंह बिष्ट व वीरेन्द्र कुमार को गिरफ्तार किया गया चार्जशीट माननीय न्यायालय में प्रेषित की गई तथा मामले का विचारण अपर जिला सत्र न्यायधीश रानीखेत के न्यायालय में चला, अभियोजन द्वारा २० गवाह न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। पत्रावली में साक्ष्य के आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।
परीशीलन के दौरान न्यायालय के मतानुसार वर्तमान मामले में, इनमें से कोई भी आवश्यक शर्त पूरी नहीं होती। चिकित्सकीय गवाही भी परिशीलन में महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में रही।
जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह वाला माना गया।पैदा करती हैं, और परिणामस्वरूप, उनकी गवाही अभियोजन पक्ष के मामले को दोषसिद्धि दर्ज करने के लिए आवश्यक सीमा तक आगे नहीं बढ़ाती है।
अभियोजन पक्ष अंतिम बार देखे जाने के सिद्धांत को स्थापित करने में विफल रहा है, क्योंकि किसी भी गवाह ने यह बयान नहीं दिया है कि मृतक को अंतिम बार आरोपी व्यक्तियों के साथ देखा गया था।इसके अलावा, कोई मकसद भी साबित नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया है कि मृतक की आरोपी व्यक्तियों से कोई दुश्मनी नहीं थी। परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित मामले में, मकसद का अभाव महत्वपूर्ण हो जाता है। पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और अहम बहस के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।

