टनकपुर की बेटी पूजा महर ने जूट उत्पादों से लिखी सफलता की कहानी, मिला ‘उदीयमान उद्यमी लखपति दीदी पुरस्कार

email image link देहरादून। उत्तराखण्ड के चम्पावत जनपद अंतर्गत टनकपुर क्षेत्र के उचौलीगोठ गांव की महिला उद्यमी पूजा महर ने अपने परिश्रम और लगन से…

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देहरादून। उत्तराखण्ड के चम्पावत जनपद अंतर्गत टनकपुर क्षेत्र के उचौलीगोठ गांव की महिला उद्यमी पूजा महर ने अपने परिश्रम और लगन से एक नई मिसाल कायम की है।


उन्हें देहरादून में आयोजित एक भव्य समारोह में उत्तराखण्ड सरकार के ग्राम्य विकास मंत्री द्वारा ‘उदीयमान उद्यमी लखपति दीदी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।


यह सम्मान उनके द्वारा ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार सृजन और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

पूजा महर ‘जय मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह’ (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं और जूट आधारित उत्पादों के निर्माण के क्षेत्र में निरंतर नवाचार कर रही हैं।


उनके द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों में जूट बैग, साइड पर्स, बोतल कवर, फाइल फोल्डर, लेडीज पर्स, किट बैग, लैपटॉप बैग, सेमिनार बैग के साथ-साथ आकर्षक सजावटी वस्तुएं भी शामिल हैं।

उनके उत्पादों की गुणवत्ता और उपयोगिता के कारण स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

इस उपलब्धि पर पूजा महर ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, समूह की अन्य महिलाओं तथा उन सभी लोगों को दिया जिन्होंने कठिन समय में उनका मार्गदर्शन और सहयोग किया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. नवीन चंद्र जोशी का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग और मार्गदर्शन से उनके गांव में जूट बैग सिलाई केंद्र की स्थापना संभव हो पाई।

उन्होंने बताया कि इस केंद्र ने गांव की कई महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। साथ ही, अब महिलाओं को जीविकोपार्जन के लिए जंगलों में कम जाना पड़ता है, जिससे जंगली जानवरों के हमलों का खतरा भी कम हुआ है। इस पहल ने न केवल आजीविका के नए अवसर सृजित किए हैं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है।

पूजा महर ने इस अवसर पर अपने पति नरेंद्र सिंह, अपने माता-पिता तथा जिला प्रशासन का भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया, जिनके निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन से वह इस मुकाम तक पहुंच सकीं।

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