अयोध्या में इतिहास का नया अध्याय, राष्ट्रपति मुर्मू ने राम मंदिर में स्थापित कराया श्रीराम यंत्र, जानें इसकी विशेषता

अयोध्या में आज हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की पवित्र शुरुआत एक और ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम…

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अयोध्या में आज हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की पवित्र शुरुआत एक और ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दूसरी मंजिल पर वैदिक विधि विधान के साथ श्रीराम यंत्र का प्रतिष्ठापन किया, जिसे देखने के लिए देश-दुनिया से बड़ी संख्या में मेहमान पवित्र नगरी पहुंचे।

राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब 11 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचीं। वहां से विशेष सुरक्षा घेरे में वे सड़क मार्ग से मंदिर परिसर गईं। आद्य शंकराचार्य द्वार से प्रवेश करते हुए उन्होंने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पूरी अयोध्या को केसरिया ध्वजों और आकर्षक सजावट से उत्सवमय बनाया गया था।

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दूसरी मंजिल पर स्थापित किया गया यह श्रीराम यंत्र सामान्य संरचना नहीं, बल्कि प्राचीन वैदिक गणना और पवित्र ज्यामितीय सिद्धांतों का विशेष मिश्रण है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, यह यंत्र दो वर्ष पहले एक शोभायात्रा के जरिए अयोध्या लाया गया था और तब से इसे विशेष रूप से संरक्षित रखा गया था।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यह यंत्र परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, जो वातावरण में सकारात्मकता और दिव्यता को बढ़ाता है। इस समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहे।

अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टिकाराम फुंडे ने बताया कि राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं। 19 मार्च को VIP दर्शन अस्थायी रूप से बंद रखे गए, लेकिन आम श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ख्याल रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देते हुए SSP गौरव ग्रोवर ने कहा कि हवाई अड्डे से मंदिर तक पूरे मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि कोई असुविधा न हो।

इस पवित्र अनुष्ठान को सम्पन्न कराने के लिए दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के कुल 51 वैदिक विद्वान शामिल हुए, जिनका नेतृत्व पुजारी गणेश्वर शास्त्री कर रहे थे। इसके साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू ने उन 400 से अधिक श्रमिकों को सम्मानित भी किया, जिन्होंने दिन रात परिश्रम कर मंदिर को वर्तमान स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई। राष्ट्रपति ने परकोटा क्षेत्र में स्थित एक मंदिर पर ध्वज फहराने का कार्य भी किया।

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