हरिद्वार में शनिवार को उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन के लिए खास दिन रहा। प्रदेश में पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार साल पूरे होने के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने हरिद्वार को 427 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास योजनाओं की सौगात दी और राज्य में ई-जीरो एफआईआर सेवा की शुरुआत भी की।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने डिजिटल बटन दबाकर ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि अब उत्तराखंड में 1930 टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से ई जीरो एफआईआर दर्ज कराई जा सकेगी। इस सेवा के शुरू होने के बाद साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पीड़ित व्यक्ति बिना थाने गए भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा जिले में दर्ज पहली ई जीरो एफआईआर की कॉपी केंद्रीय गृहमंत्री को भेंट की।
कार्यक्रम के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड पुलिस में नई भर्ती हुए पांच आरक्षियों को औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र भी सौंपे। बताया गया कि इस भर्ती प्रक्रिया के तहत करीब दो हजार आरक्षियों की भर्ती की गई है। इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पांच हिंदू नागरिकों को भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। इनमें बलूचिस्तान के शैलेश, पाकिस्तान के जसपाल कुमार और दुर्गा राजपूत के साथ अफगानिस्तान की हंसेरी बाई को भारत की नागरिकता दी गई।
इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने डिजिटल माध्यम से 1100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में शुरू की गई विभिन्न विकास योजनाओं पर आधारित विकल्प रहित संकल्प नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जिसका संपादन गिरिजा शंकर जोशी ने किया है।
दरअसल देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत Indian Cybercrime Coordination Centre द्वारा यह सुविधा शुरू की गई है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने के बाद ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो जाती है। इस व्यवस्था के जरिए पीड़ित व्यक्ति कहीं से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है।
इस प्रणाली के तहत दर्ज की गई ई-जीरो एफआईआर को तीन दिनों के भीतर संबंधित थाने में नियमित एफआईआर में परिवर्तित किया जाता है।
इससे पहले यह सुविधा देश की राजधानी नई दिल्ली में लागू की गई थी और अब उत्तराखंड में भी इसे लागू कर दिया गया है। फिलहाल दस लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में इस सुविधा के तहत ई-जीरो एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
