थायराइड अब ऐसी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो धीरे-धीरे बहुत सामान्य होती जा रही है। इस परेशानी की वजह से लोगों का वजन अनचाहे रूप से बढ़ने लगता है, शरीर जल्दी थक जाता है, बालों का झड़ना तेज हो जाता है और मूड बार-बार बदलने लगता है। ऐसी स्थितियों में दवाओं के साथ लोग घरेलू उपचारों को भी अपनाने लगे हैं, ताकि लक्षणों में थोड़ी राहत मिल सके।
इस मुद्दे पर डॉक्टर अंसारी बताते हैं कि आयुर्वेद में धनिया बीज को बेहद सरल लेकिन असरदार मसाले के रूप में देखा जाता है। उनका कहना है कि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने और हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इसे नियमित और सही तरीके से लिया जाए तो थायराइड से जुड़ी कई दिक्कतों में धीरे-धीरे सुधार महसूस होने लगता है।
अलग-अलग अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि धनिया बीज में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन ए, विटामिन सी और कई प्राकृतिक मिनरल शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं।
आयुर्वेद में यह भी बताया गया है कि धनिया शरीर की अग्नि को संतुलित करने के साथ पाचन तंत्र को बेहतर करता है और हार्मोनल बदलावों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यही वजह है कि इसे थायराइड से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है।
धनिया का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है, लेकिन सबसे अधिक इस्तेमाल धनिया पानी और धनिया चाय का होता है। धनिया पानी बनाने के लिए रात में एक चम्मच साबुत धनिया बीज एक गिलास पानी में भिगो दिया जाता है। सुबह इसी पानी को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है, जब तक इसकी मात्रा आधी न रह जाए। इसके बाद इसे छानकर खाली पेट गुनगुना पी लिया जाता है। इसे दिन में एक बार लेने की सलाह दी जाती है।
धनिया की चाय भी उतनी ही सरलता से तैयार हो जाती है। एक चम्मच धनिया बीज को हल्का-सा कूटकर एक कप पानी में डालें और इसे अच्छी तरह उबालें। इसे चाय की तरह छानकर दिन में दो बार आराम से पिया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू उपाय अपना असर धीरे-धीरे दिखाते हैं, इसलिए इसमें धैर्य रखना ज़रूरी है। आमतौर पर पंद्रह दिनों के भीतर पाचन और कुछ शुरुआती लक्षणों में हल्की राहत महसूस हो सकती है। हालांकि यह ध्यान रखना चाहिए कि धनिया का सेवन दवाओं का स्थान नहीं लेता, बल्कि एक सहायक उपाय की तरह काम करता है।
अस्वीकरण : यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार को लेकर अंतिम निर्णय डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
