बिंदुखत्ता में उमड़ा जनसैलाब, कहा राजस्व ग्राम घोषित होने तक पीछे नहीं हटेंगे

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर लालकुआं में लोगों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया लालकुआं: लालकुआं के बिंदुखत्ता को…

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बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर लालकुआं में लोगों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया


लालकुआं: लालकुआं के बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग के समर्थन में बुधवार को विशाल जनसमूह उमड़ पड़ा।


अपनी आवाज तो सरकार तक पहुंचाने के लिए बिंदुखत्ता की जनता सड़कों पर उतरी और हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग की।दावा है कि 12 हजार लोगों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।


बुधवार को विशाल जनसमूह के रूप में एकत्रित लोगों ने जुलूस निकाला और हुजूम हुए लालकुआं तहसील तक पहुंचा, जहां उन्होंने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन प्रस्तुत किया।
बिंदुखत्ता संघर्ष समिति की तरफ से साफ किया है कि अगर उनकी मांगे जल्द पूरी नहीं होती तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।


बिंदुखत्ता राजस्व गांव संघर्ष समिति के तत्वावधान में जड़ सेक्टर स्थित जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी एकत्र हुए। जनसभा में उपस्थित लोगों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए शीघ्र राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करने की मांग की।


इस सभा में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल भी पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया।


उन्होंने राज्य सरकार से अविलंब क्षेत्र को राजस्व गांव घोषित करने की अधिसूचना जारी करने की मांग की।


इधर संघर्ष समिति के पदाधिकारी अर्जुन गोस्वामी ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयावधि में मांग पूरी नहीं की गई तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

आवश्यकता पड़ने पर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव और मुख्यमंत्री आवास तक कूच भी किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


लोगों ने साफ तौर पर कहा कि जब तक बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा क्योंकि बिंदुखत्ता में करीब एक लाख की आबादी निवास करती है और वह राजस्व ग्राम चाहती है।


लोगों ने कहा कि बिंदुखत्ता के राजस्व गांव बनाने की पहली घोषणा साल 2009 में हुई थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने अपने कार्यकाल में बिंदुखत्ता के राजस्व गांव की बात कही थी, इसके बाद साल 2011 में रमेश पोखरियाल निशंक प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, उन्होंने भी बिंदुखत्ता के राजस्व गांव घोषित करने की ऐलान किया है, लेकिन शासन स्तर पर उस घोषणा पर भी कोई काम नहीं हुआ।


तीसरी बार 20 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बिंदुखत्ता के राजस्व गांव बनाने की घोषणा की, लेकिन पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। इसीलिए बिंदुखत्ता की जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।क्योंकि बार -बार जनता की उम्मीद टूट रही है।

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