नित्यानंद चरण दास के अनुसार रिश्तों में ऐसे छह लोग, जिन पर भरोसा करना पड़ सकता है भारी

चाहे जंगल हो या आध्यात्मिक साधना, साथ रहने वालों की आदतें और विचार ही हमारे मन को ढालते हैं। जिन लोगों के साथ हम रोज़…

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चाहे जंगल हो या आध्यात्मिक साधना, साथ रहने वालों की आदतें और विचार ही हमारे मन को ढालते हैं। जिन लोगों के साथ हम रोज़ रहते हैं, उनकी ऊर्जा, उनका नजरिया और उनका स्वभाव धीरे-धीरे हमारे भीतर उतरने लगता है। अगर आपकी संगत आपको आगे बढ़ाने की जगह मानसिक रूप से थका रही है, आपका आत्मविश्वास कमजोर कर रही है या आपकी शांति छीन रही है, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। यह स्पष्ट संकेत है कि आपका परिवेश आपको नुकसान पहुंचा रहा है।

  1. जो सामने मीठा और पीछे तीखी बातें करता है : ऐसे लोग किसी के दोस्त नहीं होते। सामने मुस्कान और पीछे तीखी बातें करने की आदत उनके चरित्र की असल तस्वीर दिखाती है। जब तक आप उनके सामने हैं, वे सहज रहते हैं, लेकिन आपके जाते ही वही बातें आपके खिलाफ दोहराई जाती हैं। इस तरह का व्यवहार दिखाता है कि व्यक्ति में न तो सच्चाई होती है और न निष्ठा।
  2. जो जरूरत से ज्यादा मधुर बोलता है: बहुत अधिक तारीफ, बनावटी अपनापन और हर बात पर बढ़ा चढ़ा कर कहना अक्सर किसी लाभ की चाहत का संकेत होता है। सच्चे रिश्ते ईमानदारी पर टिके होते हैं, चापलूसी पर नहीं। ऐसे लोग तब तक मधुर रहते हैं, जब तक उन्हें आपका साथ किसी उद्देश्य के लिए चाहिए। उनका स्वभाव परिस्थिति और लाभ देखकर बदल जाता है।
  3. जो अपनी गलती स्वीकार नहीं करता: कुछ लोग किसी भी हाल में खुद को ही सही साबित करते रहते हैं। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, वे दोष दूसरों पर डाल देते हैं। ऐसे व्यक्तियों से कभी स्वस्थ संबंध नहीं बन पाते, क्योंकि वे अपने भीतर झांकने की क्षमता ही नहीं रखते। जहां गलती मानने का साहस नहीं, वहां न सुधार होता है और न भरोसा टिक पाता है।
  4. जो शक्ति और प्रतिष्ठा देखकर बदल जाता है: जो व्यक्ति पैसों, पद या प्रभाव देखकर व्यवहार बदल ले, वह स्थिर स्वभाव का नहीं माना जाता। ऐसे लोग इंसान को नहीं, फायदे को प्राथमिकता देते हैं। आज आप उनके लिए उपयोगी हैं इसलिए आपको महत्व मिल रहा है, लेकिन किसी और से अधिक लाभ दिखा तो वे तुरंत पलट जाएंगे।
  5. जो किसी के दुख पर मुस्कुराता है : जिस इंसान में संवेदना नहीं होती, वह कभी किसी का सहारा नहीं बन सकता। किसी के दर्द को मजाक बनाना या उसकी पीड़ा को हल्का समझना दर्शाता है कि उसके भीतर करुणा की कमी है। जैसा कि नित्यानंद चरण दास बताते हैं, जहां एक बार भी संवेदना न दिखे, वहां आगे उम्मीद रखना बेकार है।
  6. जो दूसरों का राज संभाल नहीं सकता: जिस व्यक्ति के पास कोई भी निजी बात सुरक्षित नहीं रहती, वह भरोसेमंद नहीं होता। अगर कोई आपकी मौजूदगी में किसी तीसरे की गोपनीय बात बता रहा है, तो समझ लें कि समय आने पर आपकी निजता भी उसकी जुबान पर आ जाएगी। विश्वास टूट जाए तो रिश्ता हमेशा के लिए कमज़ोर पड़ जाता है।

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