आरबीआई ने बैंकों के प्रति अपनाया सख्त रुख, ग्राहकों को गलत तरीके से स्कीम बेची तो देना होगा पूरा रिफंड

बैंकों में अक्सर ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से स्कीम जबरदस्ती ठोक दी जाती है। इस मिस सेलिंग को रोकने के लिए आरबीआई ने…

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बैंकों में अक्सर ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से स्कीम जबरदस्ती ठोक दी जाती है। इस मिस सेलिंग को रोकने के लिए आरबीआई ने सख्त रुख अपनाया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को प्रस्ताव दिया कि बैंकों को ऐसे किसी भी ‘इनाम’ या ‘लालच’ (इंसेंटिव) से बचना चाहिए, जिसकी वजह से ग्राहकों को गलत तरीके से कोई प्रोडक्ट या सर्विस बेची जाए।

वित्तीय संस्थानों के विज्ञापन मार्केटिंग और सेल्स के लिए जारी किए गए नियमों में केंद्रीय बैंक ने कहा कि ग्राहकों को उनकी मर्जी के बिना फोन ना किया जाए। इसके साथ ही फोन का समय भी सिर्फ ऑफिस के घंटे के दौरान होना चाहिए।

अगर यह बात साबित हो जाए कि ग्राहक को गलत तरीके से कोई प्रोडक्ट बेचा गया है तो बैंकों को ग्राहक द्वारा का गए पूरी रकम वापस करनी होगी ग्राहक को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।


आरबीआई ने कहा, ‘बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी नीतियां और कार्यप्रणाली न तो गलत बिक्री के लिए प्रोत्साहन ढांचा तैयार करें और न ही कर्मचारियों/डीएसए को उत्पादों/सेवाओं की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करें।

यह विशेष रूप से सुनिश्चित किया जाएगा कि तृतीय-पक्ष उत्पादों/सेवाओं के विपणन/बिक्री में लगे कर्मचारियों को तृतीय-पक्ष से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई प्रोत्साहन प्राप्त न हो।’


यह भी कहा गया कि किसी बैंक को अपने किसी उत्पाद या सेवा के साथ किसी तृतीय पक्ष को जोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ग्राहक को विभिन्न कंपनियों के विकल्पों में से चुनने का विकल्प दिया जाएगा।

गलत बिक्री साबित होने पर बैंकों को उत्पाद या सेवा की खरीद के लिए ग्राहक द्वारा भुगतान की के पूरी राशि वापस करनी होगी।


मंजूर नीति के अनुसार गलत बिक्री के कारण हुए किसी भी नुकसान के लिए ग्राहक को क्षतिपूर्ति भी देनी होगी।


आरबीआई बैंकों से यह सुनिश्चित करने के लिए भी कह रहा है कि उनके यूजर इंटरफेस में किसी भी प्रकार के डार्क पैटर्न का उपयोग न हो और ऐसे लगभग एक दर्जन मामलों की सूची दी है जिनसे बचना चाहिए।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने गलत बिक्री पर लगाम लगाने के लिए नियम लाने की घोषणा की थी। उस घोषणा के बाद मसौदा जारी किया गया है। लोगों को मसौदे पर अपनी राय देने के लिए चार मार्च तक का समय दिया गया है।

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