UPCL की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग हुआ सख्त, 1.76 लाख रुपए की बिजली चोरी का लगाया झूठा आरोप

पौड़ी जिला उपभोक्ता आयोग पौड़ी की अदालत ने बिजली विभाग की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। आयोग में विभाग के…

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पौड़ी जिला उपभोक्ता आयोग पौड़ी की अदालत ने बिजली विभाग की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। आयोग में विभाग के द्वारा बाल भारती स्कूल मोटाढाक कोटद्वार पर लगाए गए बिजली चोरी के आरोप को फर्जी पाया है।


अदालत ने विभाग के 1.76 लाख की वसूली को रद्द किया और स्कूल प्रशासन को 7% ब्याज दर से उक्त धनराशि को रिफंड किए जाने का आदेश भी दिया है इसके साथ ही विभाग को 30000 का मुआवजा व 10 हजार का वाद व्यय प्रतिकर दिए जाने का आदेश भी दिया है।


जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग पौड़ी की अदालत में 23 मार्च 2022 को बाल भारती स्कूल मोटाढाक कोटद्वार के प्रधानाचार्य गिरिराज सिंह रावत ने एक वाद दाखिल किया था।


बताया जा रहा है कि स्कूल में विद्युत संयोजन का कनेक्शन लिया गया था माह नवंबर- दिसंबर 2028 में विभाग ने बिना मीटर रीडिंग के वभाग ने 5,999 रुपये और 6,089 विद्युत देयक दिया गया, जो सेवा के प्रति उनकी लापरवाही थी। उसके बाद विभाग द्वारा बिना मीटर चेक किए बताया कि मीटर खराब हो गया है।


उन्होंने मीटर बदलने के लिए आवेदन किया 9 जनवरी 2019 को मीटर बदलने के लिए आवेदन किया गया था।


10 दिन बाद दो कर्मचारी आए उन्होंने नया मीटर लगाने से पहले मीटर टेस्टिंग व मीटर शुल्क की मांग की रसीद देने की बात कहने पर वह नाराज हो गए और चले गए। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों बाद विभाग ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने मीटर से छेड़खानी की है। जो विद्युत चोरी का प्रयास है। उसके कुछ दिनों बाद विभाग के एसटीओ व कार्मिक आए। उन्होंने ने भी मीटर से छेड़खानी की बात कही।


फरवरी 2019 में नया मीटर लगाए जाने के बाद भी मीटर खराब बताकर 12,893 रुप का बिल थमा दिया। विभाग ने अक्तूबर 2018 से मार्च 2019 तक पांच माह का बिल मार्च 2019 में 14,187 रुपये का बिल दिया गया।

विभाग ने जुलाई 2019 में विद्यालय प्रशासन पर बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए 1.76 लाख का जुर्माना व 400 का कलेक्शन चार्ज लगाया।


जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य राकेश सामवेदी व दीप्ति भंडारी की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस, साक्ष्यों का अवलोकन कर बिजली विभाग के बिजली चोरी के आरोप को निराधार व फर्जी पाया।


अदालत ने पाया कि विभाग ने बिना किसी विधिवत मीटर रीडिंग स्थल निरीक्षण और कानूनी प्रक्रिया के ही स्कूल पर दंडात्मक बिल ठोक दिया है जो उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन है।

अदालत में बिजली चोरी की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए विद्युत विभाग को स्कूल प्रशासन को 1 लाख 76 हजार 775 रुपये की धनराशि 7 प्रतिशत ब्याजदर से 45 दिनों के भीतर दिए जाने का आदेश दिया है।


इसके अतिरिक्त मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 30,000 रुपये मुआवजा तथा 10,000 रुपये वाद व्यय दिए जाने का आदेश भी दिया। आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए बिजली विभाग को किसी भी उपभोक्ता के खिलाफ बिना ठोस जांच और वैधानिक प्रक्रिया के मनमाना या दंडात्मक बिल जारी नहीं किए जाने का आदेश दिया है।

आयोग के आदेशों की अवहेलना पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

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