लागू हुआ ‘One-Time Tax’ सिस्टम, बार-बार टैक्स से छुटकारा, कमर्शियल व्हीकल मालिकों को बड़ी राहत

अब कमर्शियल व्हीकल चालकों के लिए परिवहन विभाग ने टैक्स व्यवस्था के लिए एक अहम और राहत भरा बदलाव जारी किया है। अब हल्के कमर्शियल…

अब कमर्शियल व्हीकल चालकों के लिए परिवहन विभाग ने टैक्स व्यवस्था के लिए एक अहम और राहत भरा बदलाव जारी किया है। अब हल्के कमर्शियल वाहनों को बार-बार टैक्स नहीं देना होगा। अब उन्हें झंझट से मुक्ति मिल गई है।

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नई व्यवस्था के तहत 7500 किलोमीटर तक कुल वजन वाले व्यावसायिक वाहनों के लिए वन टाइम टैक्स प्रणाली लागू हो गई है जो 30 जनवरी से प्रभावी हुई है। इस फैसले से नोएडा और आसपास के इलाकों में संचालित करीब सवा लाख व्यावसायिक वाहनों को सीधा लाभ मिला है।


अब तक टैक्सी, मैक्सी कैब, बाइक कैब, मालवाहक और अन्य विशेष श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों के चालकों को हर साल या छह महीने में टैक्स जमा करना पड़ता था।

इससे न केवल समय और पैसे की बर्बादी होती थी, बल्कि टैक्स की तारीखें भूल जाने पर जुर्माना भी भरना पड़ता था। नई प्रणाली के लागू होने के बाद वाहन संचालकों को एक बार तय टैक्स राशि जमा करनी होगी, जिसके बाद लंबे समय तक टैक्स को लेकर कोई चिंता नहीं रहेगी।


बताया जा रहा है कि इस बदलाव का मकसद टैक्स को सरल बनाना है और लोगों को परिवहन व्यवसाय से जोड़ना है। बताया जा रहा है कि बार-बार टैक्स जमा करने की जटिल प्रक्रिया की वजह से कई लोग इस सेक्टर में नहीं आना चाहते हैं लेकिन अब यह परेशानी खत्म हो गई है।

हालांकि कुछ विशेष श्रेणी के वहां अभी भी तय अवधि पर टैक्स के दायरे में रहेंगे लेकिन अधिकतर हल्के और मध्यम कमर्शियल वाहन इस योजना से कवर हो गए हैं।


नई टैक्स व्यवस्था में अलग-अलग तरह के कमर्शियल व्हीकल के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। किराये या मेहनताना पर चलने वाली दोपहिया मोटरसाइकिलों के लिए वाहन की कीमत का 12.5 प्रतिशत एकमुश्त टैक्स देना होगा। तीन पहिया मोटर कैब के मामले में ये दर 7 प्रतिशत रखी गई है।

वहीं, चार पहिया मोटर कैब और मैक्सी कैब के लिए टैक्स वाहन की कीमत के आधार पर तय किया गया है। अगर वाहन की कीमत 10 लाख रुपये तक है तो उस पर 10.5 प्रतिशत टैक्स लगेगा, जबकि 10 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाले वाहनों पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होगा।


क्रेन, ड्रिलिंग मशीन, कंक्रीट मिक्सर और अन्य भारी उपकरणों पर वाहन की कुल कीमत का 6 प्रतिशत टैक्स निर्धारित किया गया है। माल ढोने वाले वाहनों के लिए टैक्स का आधार उनके कुल भार और माल ढोने की क्षमता होगी

जिन मालवाहक वाहनों का ग्रॉस व्हीकल वेट 3,000 किलोग्राम से ज्यादा है, उन पर 3 प्रतिशत टैक्स लगेगा, जबकि 3,000 से 7,500 किलोग्राम तक के GVW वाले वाहनों पर 6 प्रतिशत टैक्स देना होगा।