भारतीय घरों में हल्दी मिला दूध पीने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। चोट में आराम पाने से लेकर बेहतर नींद लाने तक, गोल्डन मिल्क को लोग रात में सोने से पहले एक भरोसेमंद घरेलू नुस्खा मानते हैं। सर्दी, गले की जलन या थकावट में यह अक्सर राहत देता है, लेकिन कई बार इसे बनाते समय की गई एक साधारण सी गलती इसकी पूरी ताकत कम कर देती है। इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि इस पौष्टिक पेय को आखिर किस तरह तैयार किया जाए ताकि इससे अधिकतम लाभ मिले। फोर्टिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. रिंकेश कुमार बंसल बताते हैं कि लोग किन चूकों की वजह से गोल्डन मिल्क का पूरा लाभ नहीं उठा पाते।
गोल्डन मिल्क बनाते समय जो गलती सबसे आम है अधिकतर लोग उबलते हुए दूध में ही हल्दी डाल देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब दूध बहुत गर्म होता है, तब हल्दी के सक्रिय यौगिक खासकर कर्क्यूमिन अपनी प्रभावशीलता खोने लगते हैं। यह वही तत्व है, जो हल्दी को सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण देता है। अत्यधिक गर्मी मिलने पर यह असरशक्ति कम हो जाती है, जिससे हल्दी वाले दूध से मिलने वाला फायदा आधा रह जाता है।
दूसरी बड़ी कमी यह रहती है कि लोग इसमें न काली मिर्च मिलाते हैं और न ही किसी प्रकार का अच्छा फैट। कर्क्यूमिन शरीर में अपने आप तेजी से अवशोषित नहीं होता, लेकिन काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन या घी और नारियल तेल जैसी स्वस्थ वसा इसे शरीर तक बेहतर रूप में पहुंचाती हैं। इन चीजों के बिना हल्दी का असर शरीर पर उतनी मजबूती से नहीं दिखता।
कुछ परिवार ज्यादा फायदे के लालच में हल्दी की मात्रा बढ़ा देते हैं। जबकि ऐसा करना उल्टा असर डाल सकता है। ज़्यादा हल्दी पेट में जलन, बदहजमी, गैस और मतली जैसी परेशानियां पैदा कर सकती है, खासकर तब जब इसे रोज लिया जाता है।
डॉ. बंसल ने बताया कि कि सबसे पहले दूध को हल्का गरम करें, इसे उबलने न दें। फिर इसमें एक चौथाई से आधा चम्मच हल्दी डालें। इसके साथ ही एक चुटकी काली मिर्च जरूर मिलाएँ, ताकि हल्दी शरीर में पूरी तरह अवशोषित हो सके। चाहें तो इसमें कुछ बूंदें घी की डाल सकते हैं या फिर फुल-फैट दूध का उपयोग कर सकते हैं। इसके बाद मिश्रण को एक-दो मिनट छोड़ दें ताकि सभी तत्व आपस में अच्छे से मिल जाएं। चाहें तो दूध थोड़ा ठंडा होने पर शहद, दालचीनी या अदरक भी मिलाया जा सकता है ताकि इसका स्वाद और भी बढ़ जाए।
