अल्मोड़ा:राजकीय शिक्षक संघ के मंडलीय अध्यक्ष डॉ रविशंकर गुसाई ने केन्द्रीय बजट को उम्मीद से कम, भरोसे से दूर बताया है।
उन्होंने ने कहा कि (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) NEP 2020 में शिक्षा पर GDP का 6% व्यय करने का स्पष्ट लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वर्तमान बज़ट में शिक्षा पर खर्च लगभग 2.7% तक ही सीमित है। यह अंतर केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का भी संकेत देता है।
उन्होंने कहा कि बज़ट में स्कूल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर दिखता है, पर मानव संसाधन यानी शिक्षक, शिक्षण सहायक स्टाफ और शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर गंभीर निवेश की कमी साफ़ नज़र आती है।
NEP 2020 की आत्मा शिक्षक-सशक्तिकरण, प्रशिक्षण और पर्याप्त नियुक्तियों की बात करती है, जबकि वास्तविकता में पद सीमित करने और कार्यभार बढ़ाने की प्रवृत्ति दिख रही है। यह न तो राजकीय शिक्षा के हित में है, न ही शिक्षक समुदाय के।
इसके साथ ही, शिक्षकों और वेतनभोगी कर्मचारियों को टैक्स के मोर्चे पर भी इस बज़ट से कोई ठोस राहत मिलती नहीं दिखती। बढ़ती महंगाई, ठहरी हुई आय और घटती सरकारी जिम्मेदारी के बीच यह बज़ट एक शिक्षक के लिए निराशाजनक है।
उन्होंने कहा कि बजट उम्मीद से कम और भरोसे से दूर दिखाई देता है। महँगाई के इस दौर में कर्मचारियों को जिस ठोस राहत की अपेक्षा थी, वह स्पष्ट रूप से नज़र नहीं आती।
बजट में कर्मचारियों को केवल संकेत और संभावनाओं के भरोसे छोड़ दिया गया है। सरकारी तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान को यदि प्राथमिकता नहीं मिलेगी, तो इसका असर कार्यक्षमता और मनोबल दोनों पर पड़ेगा।
