देशभर में एक फरवरी से तंबाकू से जुड़े उत्पाद पहले की तुलना में महंगे हो गए हैं। केंद्र सरकार ने कर ढांचे में संशोधन करते हुए तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट जैसे स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और नया उपकर लागू कर दिया है। जीएसटी की बदली हुई दरें भले सितंबर 2025 में प्रभावी होंगी, लेकिन इन विशेष वस्तुओं पर लागू नई कर व्यवस्था तुरंत लागू कर दी गई है।
पीटीआई के अनुसार, सिगरेट सहित तमाम तंबाकू उत्पादों पर अब अतिरिक्त उत्पाद शुल्क देना होगा, जबकि पान मसाला पर ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर’ लगाया गया है। पूर्व व्यवस्था में 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ क्षतिपूर्ति उपकर लगता था, जिसे अब नए प्रावधानों से पूरी तरह प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
एक फरवरी से एमआरपी आधारित कर मूल्यांकन प्रणाली भी शुरू हो गई है। इसका मतलब है कि चबाने वाला तंबाकू, खैनी, जर्दा और गुटखा जैसे उत्पादों पर कर की गणना अब पैकेट पर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य के आधार पर होगी। सरकार का कहना है कि इस तरीके से कर चोरी को रोकने में मदद मिलेगी और राजस्व में वृद्धि की संभावना भी बढ़ेगी।
नई नियमावली पान मसाला निर्माताओं पर सख्त निगरानी भी लागू करती है। अब उन्हें ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून’ के अंतर्गत नया पंजीकरण लेना होगा। साथ ही सभी पैकिंग मशीनों को कवर करते हुए सीसीटीवी सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है, जिसकी रिकॉर्डिंग दो साल तक सुरक्षित रखनी होगी। निर्माताओं को मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता की जानकारी भी विभाग को देनी पड़ेगी। यदि कोई मशीन 15 दिनों से अधिक समय बंद रहती है, तो उस अवधि के लिए उत्पाद शुल्क में राहत मिल सकती है।
सिगरेट पर लगने वाले कर में भी बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब इसकी लंबाई के आधार पर प्रति सिगरेट 2.05 रुपये से 8.50 रुपये तक उत्पाद शुल्क तय किया गया है। इससे लंबी और प्रीमियम सिगरेटों की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना है।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों की खपत को कम करना भी है। नई कर व्यवस्था लागू होते ही बाजार में इनके दाम बढ़ने लगे हैं और आने वाले समय में इसका असर और देखा जाएगा।
