राजधानी में अवैध शराब की तस्करी के लिए अब छोटे बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए कुख्यात शराब तस्कर नाबालिगों को वेतन पर रख रहे हैं। या खुलासा बिंदापुर इलाके में अवैध शराब की तस्करी करने निकले एक नाबालिग ने पकड़े जाने पर बताया।
पकड़े गए बच्चे ने बताया कि शराब तस्कर सलमा ने उसे ₹1000 प्रतिदिन के महानताने पर अवैध शराब बेचने के लिए रखा था। इस गिरोह में कई अन्य लोग भी शामिल हैं। फिलहाल पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और सरगना की तलाश शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि बिंदापुर थाने में तैनात कांस्टेबल देवीलाल बीट नंबर-7 में गश्त पर था। इसी दौरान एक शख्स ने उसे अवैध शराब की तस्करी की सूचना दी। कांस्टेबल मौके पर पहुंचा, तो देखा कि स्कूटी सवार शख्स एक किशोर को अवैध शराब से भरा थैला दे रहा था।
पुलिसकर्मी को देखते ही स्कूटी सवार वहां से फरार हो गया, जबकि किशोर थैला लेकर भागने लगा। पुलिसकर्मी ने उसका पीछा किया, तो वह एक घर में घुस गया। इस पर कांस्टेबल ने घर से किशोर को दबोच कर अवैध शराब से भरा थैला भी बरामद कर लिया।
पकड़े गए नाबालिग ने बताया कि वह राजस्थान का रहने वाला है। शराब तस्कर सलमा उसकी रिश्तेदार है। वह कम उम्र के बच्चों को नौकरी पर रखती है जिसकी वजह से वह भी दिल्ली आ गया। सलमा ने उसे अपने पास काम के लिए रख लिया।
उसे शराब बताए गए ठिकानों पर पहुंचने होती थी जिसके बदले में उसे रोजाना ₹1000 दिया जाता था। आरोपी ने यह भी बताया है कि सलमा अभी अपने गांव में है। शराब बेचकर जो रुपए मिलते हैं वह सलमा तक पहुंचा देता था। पुलिस अधिकारी का कहना है कि सरगना की तलाश की जा रही है। साथ ही यह जानकारी जुटाई जा रही है कि वह शराब कहां से लाती है।
दिल्ली में नाबालिग तेजी से अपराध के दलदल में उतर रहे हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल के पहले आठ माह में ही नाबालिगों के खिलाफ 1110 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा मामले चोरी के थे। पुलिस ने हत्या के मामलों में 191 नाबालिगों को पकड़ा था।
वहीं, हत्या के प्रयास के 288, लूट और डकैती के 268, दुष्कर्म के 101, मारपीट के 220 और चोरी के 575 मामलों में नाबालिग पकड़े गए।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि गैंगस्टर और तस्कर नाबालिगों से बीते कुछ समय से लगातार वारदातों को अंजाम दिला रहे हैं जिसकी बड़ी वजह है जेजे एक्ट में सख्त सजा होना। ऑब्जर्वेशन होम में उन्हें ज्यादा कड़े नियमों का सामना नहीं करना पड़ता। उम्र के आधार पर वह कड़ी सजा से बच जाते हैं।
दिल्ली पुलिस के एक अफसर के मुताबिक, ज्यादातर नाबालिग अपराधी स्कूल ड्रॉपआउट होते हैं। कई बच्चे ड्रग्स की लत में पड़कर अपराध की ओर बढ़ जाते हैं, जबकि सोशल मीडिया भी इन पर गलत प्रभाव डाल रहा है। जिसके चलते नाबालिग अपराध की दुनिया की ओर जाते हैं। सोशल मीडिया के जरिए इलाके में दबदबा बनाने के लिए नाबालिग अपराध कर रहे हैं।
