अल्मोड़ा में सरकारी शिक्षा को बचाने को हुआ शिक्षा संवाद: सरकारी शिक्षा को मजबूत किए बिना सामाजिक विकास की कल्पना संभव नहीं

अल्मोड़ा। राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा के विवेकानंद सभागार में राजकीय शिक्षक संघ, कुमाऊं मंडल कार्यकारिणी द्वारा “शिक्षा संवाद” विषय पर एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन…

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अल्मोड़ा। राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा के विवेकानंद सभागार में राजकीय शिक्षक संघ, कुमाऊं मंडल कार्यकारिणी द्वारा “शिक्षा संवाद” विषय पर एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया।


गोष्ठी का केंद्रीय विषय “सरकारी विद्यालयों पर संकट और सरकारी शिक्षा को कैसे बचाया जाए” था।


कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा, छात्रों और समाज के व्यापक हितों पर खुले मंच से संवाद किया।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात जीआईसी अल्मोड़ा के छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई।

सांस्कृतिक क्रम में छात्रा इशिका द्वारा श्री राम स्तोत्र पर प्रस्तुत कथक नृत्य ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया और उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध किया।”


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अल्मोड़ा नगर निगम के महापौर अजय वर्मा रहे।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याएं वास्तविक और गंभीर हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि शिक्षकों के लंबित मुद्दों को लेकर वे शीघ्र ही शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा को मजबूत किए बिना समाज का संतुलित और न्यायपूर्ण विकास संभव नहीं है।


मुख्य वक्ता अपर शिक्षा निदेशक, कुमाऊं मंडल शिव प्रसाद सेमवाल ने कहा कि शिक्षा का संकट केवल संसाधनों का नहीं, बल्कि गुणवत्ता और दृष्टि का भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अवधारणात्मक, तार्किक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान देना होगा। शिक्षक जितने अद्यतन होंगे, शिक्षा व्यवस्था उतनी ही सशक्त होगी।


विशिष्ट अतिथि जिला सूचना अधिकारी सत्यपाल सिंह ने सार्वजनिक शिक्षा को बचाने के लिए इस तरह के विमर्श के माध्यम से चुनौतियों की पहचान कर उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत जताई।


विशेष वक्ता पूर्व लोकसेवक गोपाल सिंह नयाल ने कहा कि पुरानी शिक्षा नीतियों, पड़ोसी विद्यालय संकलन और कोठारी आयोग की सिफारिशों को यदि आज के संदर्भ में पुनः लागू किया जाए तो सरकारी शिक्षा को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने नीति और क्रियान्वयन के बीच की खाई को शिक्षा संकट का बड़ा कारण बताया।


प्रबुद्ध लेखक एवं शिक्षक दिनेश कर्नाटक ने मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से विषय को रखते हुए कहा कि योजनाएं अच्छी हैं, लेकिन उनका सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। इससे शिक्षक और छात्र दोनों दबाव में हैं और शिक्षा का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।


शिक्षक नेता नवेन्दु मठपाल ने कहा कि सरकारी शिक्षा को कमजोर करने की प्रवृत्तियों के प्रति समाज को सजग रहना होगा, अन्यथा शिक्षा पूरी तरह बाजार के हवाले हो जाएगी।


पिथौरागढ़ से आए प्रबुद्ध शिक्षक राजीव जोशी ने अपने विचार रखते हुए शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा की मजबूती सीधे-सीधे नीतियों से जुड़ी हुई है और जब तक नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच सामंजस्य नहीं बनेगा, तब तक अपेक्षित सुधार संभव नहीं होगा।


डायट अल्मोड़ा से अंग्रेज़ी प्रवक्ता हेमा धामी तिवारी ने आंकड़ों के साथ अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा की वर्तमान स्थिति को लेकर केवल आलोचना नहीं, बल्कि गहन मंथन की आवश्यकता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं और वास्तविक परिणामों के बीच के अंतर को समझे बिना सुधार संभव नहीं है और इसके लिए सभी हितधारकों को आत्ममंथन करना होगा।


सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय से प्रोफेसर डॉ. पूरन जोशी ने कहा कि शिक्षा एक समाजवादी व्यवस्था का आधार स्तंभ है। यदि पूंजीवादी सोच हावी होती गई तो समान और सुलभ शिक्षा का सपना कमजोर पड़ेगा। इसलिए सरकारी शिक्षा को बचाना लोकतंत्र को मजबूत करने जैसा है।


सोबन सिंह जीना कैंपस के अंग्रेजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर हामिद ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ समय की नई चुनौतियों के अनुरूप शिक्षकों को स्वयं को ढालना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में शिक्षक की भूमिका और अधिक जिम्मेदार हो गई है।


डायट लोहाघाट, चंपावत के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. कमल गहतोड़ी ने एएसईआर सहित विभिन्न शैक्षिक रिपोर्टों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता पर चर्चा की और कहा कि जहां कमियां हैं, वहां सुधार की ईमानदार कोशिश होनी चाहिए।
इस अवसर पर उनकी दो शैक्षिक पुस्तकों का विमोचन अपर शिक्षा निदेश ने किया।


मंडलीय मंत्री भारतेन्दु जोशी ने शिक्षकों की समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पदोन्नति में देरी, स्थानांतरण नीति की जटिलता, गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ और प्रशासनिक दबाव को शिक्षक असंतोष का प्रमुख कारण बताया।


मंडलीय अध्यक्ष रवि शंकर गुसाईं ने कहा कि संगठन सरकार के साथ संवाद और समन्वय के माध्यम से शिक्षक समस्याओं के निराकरण के लिए प्रतिबद्ध है।


कार्यक्रम के सफल आयोजन में मंडलीय आय-व्यय निरीक्षक चंदन रावत, मंडलीय उपाध्यक्ष हर्षदीप सिंह, मंडलीय महिला अध्यक्ष प्रीति मजगाई तथा मंडलीय कोषाध्यक्ष जनार्दन तिवाड़ी, जिला मंत्री अल्मोड़ा राजू महरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंच संचालन ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद रावत, प्रीति मजगाई एवं चंदन रावत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। स्थल संचालन जिला मंत्री राजू मेहरा जी ने किया। कार्यक्रम में वीरेंद्र सिजवाली, खुशाल मेहरा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।


समापन अवसर पर यह संकल्प लिया गया कि शिक्षक समाज संगठित होकर सरकारी शिक्षा को बचाने, उसकी गुणवत्ता सुधारने और उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए निरंतर संवाद और प्रयास करता रहेगा

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