केंद्र सरकार ऑनलाइन अश्लील कंटेंट को रोकने के लिए नए नियम लाने जा रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इन्हें IT Act, 2000 की धारा 87(1) के तहत प्रस्तावित किया है। इन नियमों का मकसद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अश्लील, हिंसक या अनुचित सामग्री पर रोक लगाना है।
सरकार ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया है। मार्च 2025 में कोर्ट ने ऑनलाइन अश्लील कंटेंट को लेकर चिंता जताई थी, खासकर कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के विवादों के बाद। अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
नए नियमों के मुताबिक डिजिटल कंटेंट तब अश्लील माना जाएगा जब वह कामुकता दिखाए, लोगों की वासना को आकर्षित करे या समाज को भ्रष्ट करने वाला हो। इसके अलावा कंटेंट में जाति, धर्म, रंग, लिंग या किसी समुदाय का अपमान नहीं होना चाहिए। हिंसा, झूठी जानकारी, बच्चों और दिव्यांगजनों का मजाक, महिलाओं का अपमान या अपराध को बढ़ावा देना भी प्रतिबंधित रहेगा।
ड्राफ्ट नियम सभी डिजिटल कंटेंट को थीम और संदेश के आधार पर लेबल करने का प्रावधान करते हैं। इसके तहत हिंसा, अश्लीलता, सेक्स, भाषा, ड्रग्स और हॉरर जैसी श्रेणियां बनाई जाएंगी। साथ ही कंटेंट की उम्र के अनुसार रेटिंग भी दी जाएगी, जैसे U (सभी उम्र), 7+, 13+, 16+ और केवल वयस्कों के लिए। पैरेंटल कंट्रोल और एज वेरिफिकेशन सिस्टम भी लागू होंगे।
इन नियमों के साथ 2021 के IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics) Rules भी लागू रहेंगे, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा और नैतिकता बनी रहे।
