देहरादून में सभी सरकारी कॉलोनियों में 31 मार्च तक लगेंगे वाटर मीटर, एसटीपी प्लांट्स की रियल टाइम मॉनिटरिंग की तैयारी शुरू

देहरादून. वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म होने में अब करीब दो महीने ही बचे हैं, ऐसे में उत्तराखंड सरकार ने सभी विभागों को अपने-अपने कामों की…

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देहरादून. वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म होने में अब करीब दो महीने ही बचे हैं, ऐसे में उत्तराखंड सरकार ने सभी विभागों को अपने-अपने कामों की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दे दिए हैं। सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने पूंजीगत व्यय, सीएसएस, ईएपी और नाबार्ड से जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी योजना का प्रस्ताव अब देरी से नहीं भेजा जाना चाहिए।


बैठक में उन्होंने साफ कहा कि रीइंबर्समेंट क्लेम समय पर भेजना अनिवार्य है, ताकि विभागों को फंड मिलने में कोई अड़चन न आए। उन्होंने सभी विभागों को काम की टाइमलाइन तय कर उसकी मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए, ताकि प्रोजेक्ट समय से पूरे हों और उनकी गुणवत्ता भी बनी रहे।


मुख्य सचिव ने वित्त और नियोजन विभाग को स्वतंत्र थर्ड पार्टी मूल्यांकन की व्यवस्था और मजबूत करने को कहा। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं में यह व्यवस्था नहीं है, उनमें तुरंत इसे लागू किया जाए और जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाही पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।


बैठक में देहरादून की सभी सरकारी कॉलोनियों में 31 मार्च तक वाटर मीटर लगाने के निर्देश भी जारी किए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि नगर निगमों में भी वाटर मीटर लगाए जाने से पानी की बर्बादी पर रोक लगेगी। साथ ही दूषित पानी की शिकायतों पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए।


सौंग बांध परियोजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने पेयजल घटक से संबंधित डीपीआर एक सप्ताह के भीतर शासन को भेजने को कहा। इसके अलावा एसटीपी से निकलने वाले ट्रीटेड पानी को सिंचाई और अन्य गैर-पीने वाले कार्यों में उपयोग करने पर जोर दिया गया।


मुख्य सचिव ने विभागों को अपनी योजनाओं में जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में काम करने और ऊर्जा बचत के लिए सोलर सिस्टम को बैटरियों से जोड़ने की संभावनाएं तलाशने को कहा। उन्होंने क्लाइमेट चेंज फंड का प्रभावी उपयोग करने के भी निर्देश दिए।
सिंचाई विभाग को अगले पांच साल में राज्य की सिंचित भूमि को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य दिया गया। इसके लिए नए बैराज, नहरों और बेहतर प्रोजेक्ट्स पर काम करने को कहा गया। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाए गए स्प्रिंकलर सिस्टम को प्रदेशभर में लागू करने के भी निर्देश दिए गए।


शहरी विकास विभाग को देहरादून समेत सभी बड़े शहरों में विशाल पार्क विकसित करने के निर्देश मिले। साथ ही टिहरी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने, टिहरी झील रिंग रोड परियोजना को आगे बढ़ाने और चंपावत व ऋषिकेश में पर्यटन गतिविधियां बढ़ाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया।


मुख्य सचिव ने वन विभाग को सिटी ग्रीनिंग और एक्सप्रेस-वे से जुड़े प्रोजेक्ट्स के साथ बायो-फेंसिंग मॉडल तैयार करने को कहा। वहीं आईटी विभाग को साइंस सिटी और विज्ञान केंद्र स्थापित करने और उनके संचालन के लिए ठोस व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।

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