उत्तराखंड के देहरादून से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया। यहां के गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज पटेल नगर में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग की गई और मारपीट भी की गई।
आरोप है कि जूनियर्स को बेल्टों से पीटा गया है।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर गीता जैन का इस मामले को लेकर बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि एंटी रैगिंग कमेटी इस घटना की विस्तार से जांच कर रही है। कमेटी ने रिपोर्ट आने के बाद दोषी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई भी की है डिसिप्लिन कमेटी ने छात्रों के बयान दर्ज किया और कहा कि कॉलेज में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि अगर छात्रों पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें कॉलेज से सस्पेंड करना भी शामिल हो सकता है।
पहले स्कूल कॉलेज में रैगिंग को हल्के और मजाक तौर पर लिया जाता था और सीनियर्स द्वारा जूनियर्स से कुछ टास्क पूरे करवाए जाते थे जो मजेदार होता था और सीनियर जूनियर के बीच दोस्ती का कारण भी बनते थे लेकिन समय के साथ रैगिंग का रूप बदल गया है।
अब सीनियर्स द्वारा जूनियर्स को टॉर्चर किया जाता है और हद तो तब हो गई जब रैगिंग की वजह से कुछ बच्चों ने सुसाइड भी कर ली। कुछ को सीनियर्स ने ही मार डाला। इस तरह के तमाम मामले देखे जा रहे हैं।
इसके बाद भारत में रैगिंग को कॉलेज का मजाक नहीं बल्कि एक गंभीर अपराध माना गया। सुप्रीम कोर्ट, UGC और विभिन्न राज्य कानूनों के कारण रैगिंग को लेकर सजा का प्रावधान है और इसकी सजा काफी सख्त है। रैगिंग का आरोप सही पाए जाने पर दोषी को जेल और जुर्माना दोनों को भुगतना पड़ सकता है। इसमें रैगिंग के प्रकार के हिसाब से कोर्ट द्वारा 2 साल तक की कैद से लेकर आजीवन कारावास और मृत्युदंड तक की सजा है।
इसके अलावा यूजीसी भी रैगिंग को लेकर काफी सख्त है और ऐसा होने पर आरोपी के स्थायी रूप से निष्कासन समेत जुर्माना लगाया जा सकता है।
