देहरादून। उत्तराखंड की सीमाओं पर दूसरे राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस वसूली की प्रक्रिया आखिरकार आज शुरू हो गई। लंबे समय से चली आ रही तैयारी के बाद सरकार ने इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा और सड़कों के रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है। हालांकि शुरुआत के पहले दिन ही तकनीकी खामियों की वजह से पूरा सिस्टम उम्मीद के मुताबिक तेज नहीं चल पाया।
नारसन चेक पोस्ट से हुई औपचारिक शुरुआत। हरिद्वार के नारसन चेक पोस्ट पर आज सुबह से ही बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियों की चेकिंग और शुल्क वसूली का काम शुरू किया गया। वाहनों की संख्या अधिक होने से यहां लगातार भीड़ बनी रही और सेस वसूली की प्रक्रिया पूरे दिन चलती रही।
पहले दिन तकनीकी रुकावटों से काम में आई सुस्ती। परिवहन विभाग के मुताबिक, नेटवर्क का बार-बार कमजोर पड़ना और सॉफ्टवेयर का समय-समय पर फ्रीज होना सबसे बड़ी परेशानी साबित हुआ। कई वाहनों का डेटा सिस्टम में दर्ज नहीं हो पाया, जिसके चलते निर्धारित शुल्क वसूला नहीं जा सका। विभागीय टीमें मौके पर ही सिस्टम सुधारने की कोशिश करती रहीं और आंशिक रूप से वसूली का काम जारी रखा।
कितने वाहनों पर लागू हुआ ग्रीन सेस। पहले दिन कुल करीब 850 वाहनों को रोका गया, जिनमें से लगभग 650 वाहनों से सेस वसूला जा सका। शेष वाहनों को तकनीकी वजहों से बिना शुल्क आगे बढ़ा दिया गया। अधिकारियों ने साफ किया कि यह सिर्फ शुरुआती परेशानी है और जल्द ही सभी दिक्कतें दूर कर दी जाएंगी।
