जौनसार बावर के चकराता क्षेत्र में रिकार्ड तोड सर्दी के कारण जनजीवन प्रभावित है। यहां इस बार अब तक सीजन की पहली बर्फबारी नहीं हुई है। पेड़ों पर जमा हुआ पाला बर्फबारी का एहसास कर रहा है।
दिन में 5 डिग्री और रात में -4 डिग्री तक यहां का तापमान पहुंच गया है जिसकी वजह से मवेशियों के लिए चारा पत्ती लाना भी काफी मुश्किल हो गया है। बागवानी व खेती पर लगातार प्रभावित हो रही है। क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि इस बार रिकॉर्ड सर्दी लंबे समय तक याद रखी जाएगी। यह पहला मौका है जब ना वर्षा हुई और ना बर्फबारी हुई है जबकि आदि जनवरी बीत गई है।
हिमालय की गोद में बसे चकराता क्षेत्र को अपने सुहावने मौसम, बर्फबारी और बागवानी के लिए जाना जाता रहा है। यहां का मौसम हमेशा चर्चा में रहा है, लेकिन इस वर्ष की शीत ऋतु में मौसम की बेरुखी चौंकाने वाली है।
रात भर गिरने वाले जबरदस्त पाले ने पेड़-पौधों को झुलसा दिया है और खेतों, सड़कों व आंगन में सुबह का दृश्य ऐसा प्रतीत होता है जैसे बर्फबारी हुई हो।
स्थानीय नरेंद्र सिंह, सालक राम, प्रताप सिंह चौहान, राम सिंह, दिनेश चांदना, तरुण कुकरेजा, मोनित दुसेजा, कमल रावत आदि का कहना है कि चकराता क्षेत्र में कई बार तो नवंबर में भी बर्फबारी हो चुकी है। दिसंबर अंत में बर्फबारी के कारण नए साल का जश्न मनाने आने वाले पर्यटक खुश होकर जाते थे, लेकिन इस बार जनवरी में भी वर्षा व बर्फबारी के दर्शन नहीं हुए।
ऊंचाई वाले गांव में नदी नाले प्राकृतिक जल स्रोत और यात्री की पेयजल लाइन भी जम गई है जिससे पानी का संकट उत्पन्न हो गया है माघ मरोज पर्व का जश्न भी घरों के अंदर ही मनाया जा रहा है।
बागवान महावीर रावत, महाबल सिंह नेगी, यशपाल रावत, बृजेश कुमार जोशी, गौरव चौहान, देवेंद्र चौहान आदि का कहना है कि पाले के कारण सेब, पुलम, आडू, चुलू के पेड़ झुलसने लगे हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होने की प्रबल आशंका बनी हुई है। साथ ही लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।
