प्रदेश के कार्मिक अपने दो माह के वेतन जितनी चल व अचल संपत्ति की खरीद आसानी से कर सकेंगे। इससे अधिक की संपत्ति की खरीद के लिए उन्हें शासन से अनुमति प्राप्त करनी होगी। इसके लिए कार्मिक विभाग कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन किया जा रहा है।
इसे जल्द कैबिनेट में प्रस्तुत भी किया जाएगा। प्रदेश में अभी कार्मिकों द्वारा चल अचल व बहुमूल्य संपत्ति की खरीद को लेकर पुराना आदेश लागू है। इसकी वजह से कोई भी सरकारी कर्मचारी 5000 से अधिक मूल की किसी भी चल संपत्ति का क्रय या विक्रय करता है तो इसके लिए उसे इसकी रिपोर्ट देने के साथ ही अनुमति भी समुचित प्राधिकारी से लेनी होगी।
बताया जा रहा है की अचल संपत्ति अथवा बहुमूल्य संपत्ति को खरीदने अथवा बचने के लिए समुचित प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी। जुलाई में शासन ने इस आदेश का सख्ती से अनुपालन करने के निर्देश दिए थे। उस समय कर्मचारी संगठनों ने इसका तीव्र विरोध किया था।
बताया जा रहा है कि यह आदेश वर्ष 2002 में दिया गया था। तब से अब तक कर्मचारियों के वेतन में कई गुना वृद्धि हो चुकी है, ऐसे में यह व्यवस्था अप्रासंगिक है। इस पर शासन ने कार्मिक विभाग को नियमावली में संशोधन करने के आदेश दिए थे।
अब जो प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है उसके अनुसार कार्मिक अपने वेतन के अनुरूप घरेलू उपयोग की वस्तुएं तथा चल संपत्ति के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं आभूषणों व अन्य आवश्यक सामग्री निर्धारित कर खरीद पाएंगे
इससे न केवल कर्मचारियों की सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि बार-बार अनुमति लेने की प्रक्रिया भी समाप्त हो जाएगी। सचिव कार्मिक शैलेश बगौली ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में बदलाव के लिए नियमावली में संशोधन किया जा रहा है।
अब केंद्र की तर्ज पर ही प्रदेश के कार्मिक भी बिना अनुमति के एक निर्धारित सीमा तक चल व अचल संपत्ति का क्रय कर सकेंगे।
