सर्दियों में गर्भवती महिलाओं के लिए चेतावनी ! थकान और बढ़ते संक्रमण से खुद को इस तरह रखें सुरक्षित

सर्दियों के मौसम में ठंडी हवाएं चलती है और धूप कम होती है, तापमान का लगातार बदलना शरीर पर सीधा असर डालते हैं। आम लोगों…

सर्दियों के मौसम में ठंडी हवाएं चलती है और धूप कम होती है, तापमान का लगातार बदलना शरीर पर सीधा असर डालते हैं। आम लोगों के लिए यह मौसम थोड़ी आलस भरी और सुस्ती लेकर आता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह समय ज्यादा ध्यान और नरमी से देखभाल करने का होता है।

गर्भावस्था में शरीर के अन्दर कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से प्रतिरक्षक प्रणाली पहले की तुलना में कमजोर हो जाती है। ऐसे में ठंड लगना सर्दी जुकाम होना जोड़ों में अकड़न या थकान जल्दी पकड़ लेती है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों का मानना है कि यदि दिनचर्या खान-पान और शरीर की देखभाल सही तरीके से की जाए तो सर्दियां गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे से के लिए बिल्कुल सुरक्षित और आरामदायक साबित हो सकती है।

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आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में वात दोष बढ़ने लगता है, जिससे शरीर में ठंडापन रूखापन और दर्द की शिकायत बढ़ जाती है। अगर गर्भवती महिला अपने शरीर को गर्म रखें तो बात संतुलित रहता है और शरीर हल्का महसूस करता है। विज्ञान का भी यही मानना है कि सर्दी के मौसम में शरीर अपने तापमान को बनाए रखने में ऊर्जा खर्च करता है। जिसकी वजह से थकान बढ़ती है। इसलिए उन्हें आरामदायक कपड़े पहनना जरूरी होता है। सर और पर ढककर रखने से शरीर की गर्मी नहीं निकलती और ठंडे का असर कम होता है । दिन में कुछ देर लेना जो कि धूप विटामिन डी की प्राकृतिक स्रोत है जो मां की हड्डियों और बच्चे के विकास दोनों के लिए बहुत जरूरी होता है।

ठंड में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर को पानी की जरूरत पूरी रहती है। आयुर्वेद का मानना है कि गुनगुना पानी पचाने के लिए सबसे अच्छा माना गया है, विज्ञान भी यही बताता है कि पर्याप्त पानी से कब्ज थकान और यूरिन इन्फेक्शन का खतरा कम होता है। गुनगुना पानी सूप और हल्की हर्बल चाय शरीर को अंदर से गर्म रखने और रक्त संचार बेहतर करने में सहायक होते हैं। जिससे कि पोषण बच्चे तक आसानी से पहुंच जाता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए अचानक ठंडे माहौल से गर्म जगह में या गर्म कमरे से ठंडा में जाना नुकसानदायक हो सकता है। आयुर्वेद से शरीर के स्वाभाविक संतुलन को बिगड़ने वाला मानता है, जबकि विज्ञान का कहना है कि तापमान के तेजी से बदलने पर शरीर को खुद को डालने का मौका नहीं मिलता, जिससे सर्दी या बुखार के आशंका बढ़ जाती है। घर से बाहर जाते समय थोड़ी देर रुक कर मौसम के अनुसार खुद को तैयार करना शरीर को आराम देता है।

सर्दियों में गर्भवती महिला के लिए पौष्टिक भोजन की असली ताकत होता है और ऊर्जा देने वाला भोजन शरीर के लिए सबसे अच्छामाना जाता है। गाजर, चुकंदर, पालक, मेथी और शकरकंद जैसी मौसम सब्जियां खून बढ़ाने के साथ-साथ बच्चे के विकास के लिए पोषक तत्व जरूरी होते है। विज्ञान भी मानता है कि यह भोजन आयरन फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं जो की मां की इम्युनिटी को मजबूत करते हैं।