देहरादून। उत्तराखंड की पहाड़ियों में इस साल मॉनसून ने भारी तबाही मचाई है। चमोली जिले में आई आपदा ने कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है। कुंतरी फाली गांव में मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी है। रेस्क्यू टीमों ने दिन-रात मेहनत करके कई शव और कुछ जीवित लोगों को बाहर निकाला। 19 सितंबर को 16 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद कुंवर सिंह को सुरक्षित बचाया गया लेकिन उनकी पत्नी कांता देवी और उनके 10 साल के जुड़वां बेटे विशाल और विकास मलबे में दबकर मारे गए।
गांव के लोग दुख और मातम में डूबे हैं। घर-घर खामोशी पसरी हुई है और हर किसी का दिल सवाल करता है कि इतनी निर्दयता क्यों। शुक्रवार को मलबे से पांच शव निकाले गए। ग्रामीणों ने बताया कि कांता देवी ने आखिरी सांस तक अपने बच्चों को बचाने की कोशिश की लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
इसी गांव की संगीता देवी की कहानी भी दर्दनाक है। कुछ साल पहले उन्होंने अपने पति को खोया था और अब इस आपदा ने उनका घर भी उजाड़ दिया। संगीता अपनी बेटी के साथ गांव में रहती थीं और खेती-बाड़ी करके गुजारा करती थीं। अब उनका आशियाना मलबे में समा चुका है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मिले। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर पीड़ित के साथ खड़ी है और पुनर्वास व राहत कार्य तेजी से किए जाएंगे। उत्तराखंड में लगातार बारिश और भूस्खलन ने जिंदगी को असुरक्षित बना दिया है। सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों अभी भी लापता हैं।
