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ताजमहल की नींव तक पहुंचा यमुना का उफान, बढ़ते जलस्तर से स्मारकों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

ताजमहल की यमुना से लगती पिछली दीवार तक पानी पहुंचने के बाद एक बार फिर इस बात पर चर्चा छिड़ गई है कि इसका असर…

ताजमहल की यमुना से लगती पिछली दीवार तक पानी पहुंचने के बाद एक बार फिर इस बात पर चर्चा छिड़ गई है कि इसका असर स्मारक की नींव पर कैसा होगा। पुरातत्व विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि नुकसान की आशंका कम है बल्कि फायदा ज्यादा होगा। उनका कहना है कि ताजमहल की नींव में जिस लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है वह पानी के संपर्क में आने से खराब नहीं होती। फिलहाल पानी के असर की जांच विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी जिसके बाद आगे का कदम तय होगा।

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यमुना का पानी इस समय सीधे ताजमहल की दीवार से टकरा रहा है। वहीं आगरा किला की खाई में तीन फीट तक पानी भर गया है और एत्माउद्दौला के पीछे बने कई कमरे पांच फीट पानी में डूब चुके हैं। ताज व्यू प्वाइंट तक भी पानी पहुंचने की आशंका है। लगातार बढ़ते जलस्तर से स्मारकों में सीलन और नुकसान का खतरा बढ़ गया है।

शहर के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कई मोहल्लों और बस्तियों में पानी भरने से लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं। दयालबाग से लेकर सिकंदरपुर रोड तक सड़कें जलमग्न हो गई हैं। कैलाश मंदिर की सीढ़ियां डूब चुकी हैं और निचले इलाकों के परिवार सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। मेहरा नाहरगंज में चालीस परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है।

यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर चला गया है। गुरुवार शाम पांच बजे यह 497 दशमलव पांच फीट दर्ज किया गया जबकि चेतावनी स्तर 495 फीट है। अधिकारियों का कहना है कि रविवार तक यह 499 फीट तक पहुंच सकता है। पोइया घाट पर अंतिम संस्कार करने में भी लोगों को दिक्कत हो रही है क्योंकि घाट डूब गया है और पानी में खड़े होकर संस्कार करना पड़ रहा है।

प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक यमुना की बाढ़ से चालीस से ज्यादा गांव प्रभावित हो सकते हैं। इनमें से अठारह गांवों को ज्यादा खतरे वाले क्षेत्र में रखा गया है। इनमें रहनकला बुढ़ाना नगला कटा शाहिदपुर वीरपुरा पारौली बिचौला गिदरौन भरापुरा नगला धीमर नगला पैमा नगला तल्फी नाहरगंज समेत अन्य गांव शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि लगातार बैराजों से पानी छोड़ा जा रहा है। हथिनीकुंड से एक लाख बयालिस हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया। ओखला बैराज से दो लाख चालीस हजार क्यूसेक पानी और मथुरा के गोकुल बैराज से एक लाख सात हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण यमुना का जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।