अफगानिस्तान में रविवार देर रात बड़ा भूकंप आया जिसने पूरे इलाके में तबाही मचा दी। आधी रात को आए इस भूकंप की तीव्रता छह बताई गई है और अब तक हजार से ज्यादा लोगों के जान गंवाने की पुष्टि हो चुकी है। घायलों की संख्या तीन हजार से भी ऊपर पहुंच गई है।
जर्मनी के जियोसाइंसेज रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक झटकों का केंद्र जालालाबाद शहर से करीब सत्ताईस किलोमीटर दूर रहा। इसकी गहराई केवल दस किलोमीटर थी जिसकी वजह से झटके बेहद खतरनाक साबित हुए। कई गांव पूरी तरह बर्बाद हो गए और लोग मलबे में दब गए।
अफगान मीडिया एंड रिसर्च सेंटर के प्रमुख अब्दुल जब्बार बेहिर ने बताया कि इस आपदा में कम से कम ग्यारह सौ लोगों की मौत हो चुकी है और करीब साढ़े तीन हजार घायल हैं। वहीं अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि सबसे ज्यादा मौतें कुनार प्रांत में हुई हैं। इसके बाद सोमवार को भी चार दशमलव छह तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया जिसकी गहराई पैंसठ किलोमीटर बताई गई। अल जजीरा के अनुसार झटके पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब तक महसूस किए गए और असर भारत के गुरुग्राम तक पहुंचा।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि अफगानिस्तान में आई इस आपदा से हुई जानमाल की हानि से वे गहरा दुख महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुख की इस घड़ी में अफगानिस्तान के साथ खड़ा है और हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी कि उन्होंने अफगान विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी से फोन पर बात की और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
जयशंकर ने बताया कि भारत की ओर से मदद भेजी जा चुकी है। टेंट और पंद्रह टन खाद्य सामग्री काबुल से कुनार पहुंचाई गई है और आगे भी राहत सामग्री भेजी जाएगी। इस भूकंप से दाराह ए नूर जिले का साटिन गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। शुरुआत में मौत का आंकड़ा नौ बताया गया था लेकिन धीरे धीरे यह संख्या लगातार बढ़ती गई। अब भी बड़ी संख्या में लोग घायल हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं और पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है।
