गुजरात में 49 वर्षों में पहली बार जमीन से निकला चक्रवती तूफान

बीते कई दिनों से गुजरात में आसमान से बरस रही बारिश आफत बनकर बरस रही है। जिसको देख लग रहा है जैसे की राज्य में…

बीते कई दिनों से गुजरात में आसमान से बरस रही बारिश आफत बनकर बरस रही है। जिसको देख लग रहा है जैसे की राज्य में जल प्रलय आ गई हो, बाढ़ की वजह से लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, आईएमडी ने शुक्रवार को कच्छ की खाड़ी में जमीन वाले भाग के पास एक गहरे दबाव के साइक्लोन के उत्पन्न होने की जानकारी थी।

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इस साइक्लोन/चक्रवात का नाम आसना (ASNA) रखा है। इसका नाम पाकिस्तान ने दिया है। लगभग 49 सालों के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि कोई साइक्लोन तटीय क्षेत्रों में डेवलप होकर समुद्र की तरफ बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने बताया कि इस साइक्लोन से कोई खतरा नहीं है। वह तट से समुद्र की तरफ बढ़ रहा है।

आईएमडी ने बताया कि गुजरात के कच्छ के पास और पाकिस्तान तथा पूर्वोत्तर अरब सागर के करीबी क्षेत्रों के ऊपर बना ‘गहरे दबाव’ की वजह से बना साइक्लोन पश्चिम की ओर 6 km/hr की स्पीड से अरब सागर में चला गया है। इस साइक्लोन आसना का नाम पाकिस्तान ने दिया था। यह बीते दो दिनों तक भारतीय तट से दूर उत्तर-पूर्व अरब सागर के ऊपर लगभग पश्चिम-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ता रहेगा।

डिप डिप्रेशन एक कम दबाव की स्थिति है जिसमें हवा की रफ्तार 52 किमी प्रति घंटे से 61 किमी प्रति घंटे तक होती है, जबकि साइक्लोन में हवा की गति 63 किमी प्रति घंटे और 87 किमी प्रति घंटे के बीच होती है। किसी कम दबाव प्रणाली के साइक्लोन में बदलने के लिए समुद्र की सतह का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक होना आवश्यक है। अगर देखा जाए तो बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह का तापमान 28-30 डिग्री सेल्सियस है। अरब सागर में यह लगभग 27-28 डिग्री सेल्सियस है। यानी कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में साइक्लोन के लिए आदर्श परिस्थिति बनी हुई है