हाथरस हादसा : बाबा की एक गलती और मच गई भगदड़ , हर तरफ मची चीख पुकार

हाथरस में मची भगदड़ में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबर बज। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बाबा के जाने से पहले सब…

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हाथरस में मची भगदड़ में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबर बज। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बाबा के जाने से पहले सब सही था। लेकिन जैसे ही पंडाल स्थल से बाबा का काफिला निकला, लोग बेकाबू हो गए।इस दौरान एकदम से भगदड़ मच गई। गर्मी और उमस के कारण भी लोग बेचैन होकर भागने लगे। हाथरस के रतिभानपुर क्षेत्र में सत्संग के समापन का काम आखिरी दौर में था। लेकिन तभी भगदड़ मच गई।

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सत्संग का आयोजन एक खेत में किया जा रहा था। पंडाल में आगे हजारों की संख्या महिलाएं बैठी थीं। कुछ महिलाएं उत्साह में पंडाल के खंभों पर भी चढ़ी हुईं थीं। यहां पर लोगों को गर्मी से बचाने के लिए कोई खास प्रबंध नहीं किए गए थे।दोपहर के समय करीब एक बजकर 45 मिनट पर बाबा का काफिला आयोजन स्थल से बाहर निकला। काफिले के दौरान अनुयायियों को रोक लिया गया था। लेकिन जैसे ही काफिला निकला, इसके बाद अनुयायी एकदम से भागने लगे। बताया जाता है कि बाबा अपनी बीवी के साथ प्रवचन करते हैं। लोगों के मुताबिक बाबा के जाने के बाद लोग सम्मान के प्रतीक के रूप में माथे पर ‘मिट्टी’ लगाते हैं, जहां से बाबा का वाहन गुजरता है।

बताया जा रहा है कि ऐसा करने के लिए ही लोग उतावले हो गए। जिसके कारण भगदड़ मच गई।वहीं इस घटना का जिम्मेदार गर्मी और उमस को भी माना जा रहा है। लोग भीषण गर्मी से परेशान थे। भीड़ में कई लोगों का दम घुट गया और वह वहीं गिर गए। लोग एक-दूसरे को रौंदकर भागने लगे। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है?एक युवती ने बताया कि लोग जल्दी में निकलने की कोशिश कर रहे थे। जिस कारण एकदम से माहौल बेकाबू हो गया। लोग बिना देखे एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। हर तरफ चीख पुकार मची थी। कुछ लोग गिरे थे, कुछ लोग उनको कुचलकर आगे बढ़ रहे थे। सत्संग में यूपी ही नहीं, राजस्थान, हरियाणा और एमपी के लोग भी आए थे।

भीड़ इतनी थी कि 3 किलोमीटर तक वाहन फैले हुए थे। सीएम ने अधिकारियों को जांच के आदेश देते हुए 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।बाबा लोगों को इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व अधिकारी बताते हैं। बाबा की सुरक्षा में विशेष सेवादार तैनात रहते हैं और बाबा अपने सत्संग में जल को प्रसाद के रूप में वितरित करवाते हैं। बाबा के आयोजन इतने बड़े होते हैं कि तय डेट से 15 दिन पहले ही योजना, व्यवस्था शुरू हो जाती है।