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ED,BSF,ITBP समेत 25 एजेंसियां नजर रखेंगी चुनावी खर्चों पर

निर्वाचन आयोग ने इस बार चुनावी खर्च पर नजर रखने के लिए विशेष तैयारी की है। जिला स्तर पर 9 टीमे चुनाव लड़ने वाली उम्मीदवारों…

निर्वाचन आयोग ने इस बार चुनावी खर्च पर नजर रखने के लिए विशेष तैयारी की है। जिला स्तर पर 9 टीमे चुनाव लड़ने वाली उम्मीदवारों के खर्चों का हिसाब किताब देखेंगी। इन टीमों के साथ केंद्र एवं राज्य की 25 एजेंसियां भी शामिल की गई है।

अगर कहीं पर छापा मारने की नौबत आई तो  ईडी, बीएसएफ, लोकल पुलिस, आयकर विभाग, आईटीबीपी व डीआरआई सहित दो दर्जन एजेंसियां, अविलंब मौके पर पहुंचेंगी। उक्त 25 एजेंसियों में से कोई न कोई बल या प्रवर्तन विंग, चुनावी क्षेत्र में मौजूद रहेंगे।

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16 मार्च को लोकसभा और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया गया। इसके साथ ही देश की आदर्श आचार संहिता को भी लागू किया गया। लोकसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण की वोटिंग 19 अप्रैल को और आखिरी चरण का मतदान 1 जून को होगा। 4 जून को वोटो की गिनती की जाएगी। राष्ट्रीय चुनाव आयोग में केंद्र एवं राज्यों को सख्ती से आचार संहिता का पालन करने का आदेश दिया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनावी खर्च को लेकर कहा कि कुछ पार्टियां डमी कैंडिडेट खड़ा करके उनके जरिए चुनाव में खर्च ज्यादा करती हैं । डमी कैंडिडेट के नाम पर संसाधनों, वाहनों व दूसरी सामग्री का इस्तेमाल, वे अपने मुख्य उम्मीदवार के लिए करते हैं। इस बार चुनाव आयोग ने प्रभावी तरीके से ऐसे खर्च पर नकेल कसने की योजना बनाई है।

उम्मीदवारों के चुनावी खर्च के प्रभावी निगरानी के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने व्यापक निर्देश जारी किए हैं।एक सीट के लिए व्यय पर्यवेक्षक, सहायक व्यय पर्यवेक्षक, फ्लाइंग स्क्वाड (एफएस), स्टेटिक निगरानी टीम (एसएसटी), वीडियो निगरानी टीम (वीएसटी), वीडियो देखने वाली टीम (वीवीटी), लेखा टीम (एटी), मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (एमसीएमसी) और जिला व्यय निगरानी समिति (डीईएमसी) का गठन किया गया है।

इसके साथ ही विभिन्न केंद्रीय और राज्य की प्रवर्तन एजेंसियां भी इसमें शामिल की गई है। इनमें राज्य पुलिस विभाग, राज्य उत्पाद शुल्क विभाग, आयकर विभाग, एफआईयू-आईएनडी, सीबीआईसी, डीआरआई, सीजीएसटी, एसजीएसटी, राज्य वाणिज्यिक विभाग, ईडी, एनसीबी, सीआईएसएफ, आरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी, असम, राइफल्स, आईसीजी, डाक विभाग, बीसीएएस, एएआई, आरबीआई, एसएलबीसी और राज्य वन विभाग शामिल हैं।

राज्य उत्पादन शुल्क विभाग को चुनाव प्रक्रिया के दौरान शराब और मुफ्त वस्तुओं के रूप में प्रलोभन देना वितरण बिक्री और भंडारण निगरानी करने के लिए भी कहा गया है। जीपीआरएस ट्रैकिंग का उपयोग कर एफएस/एसएसटी के कामकाज और संचालन की बारीकी से निगरानी की जाएगी। यह भी आदेश दिए गए हैं कि चुनावी खर्चों पर निगरानी रखने के लिए उम्मीदवार को एक अलग से बैंक खाता खोलना होगा। चुनाव का खर्च केवल इस खाते से किया जाएगा।

आयकर विभाग को राज्यों के हवाई अड्डों पर एयर इंटेलिजेंस यूनिट्स (एआईयू) को सक्रिय करने और सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में बड़ी मात्रा में धन की आवाजाही की जांच करने के लिए खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। इसके लिए ऐसे नियंत्रण कक्ष और शिकायत निगरानी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान 24 घंटे कार्यरत रहेंगे।