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अल्मोड़ा:: नाबालिग(minor) के साथ हुए दुर्व्यवहार पर कार्रवाई की बजाय, पुलिस ने पेश कर दिया परिजनों के कार्रवाई ना चाहने का पत्र

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Instead of taking action on the misbehavior with the minor, the family members presented a letter not wanting action.

अल्मोड़ा, 17 नवंबर 2021- पाँक्सो जैसा कानून बना ही इसलिए था कि पीड़िता (minor) की गरिमा बनाए रखते हुए किसी भी दुर्व्यवहार, दुर्व्यवहार की आशंका या दुर्व्यवहार की संभावना को रोकने को प्रबल कार्रवाई की जाए।

लेकिन मामले में सूचना होने और पीड़ित(minor) की सामाजिक व स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अग्रिम कार्रवाई करने के बजाय एक महीने बाद पुलिस की ओर से कार्रवाई की जगह नाबालिग व उसके परिजनों की कार्रवाई नहीं करने संबंधी पत्र पेश करना अपने आप में अनोखा मामला है।

मिली जानकारी अनुसार एक महीने बाद एक पत्र बाल कल्याण समिति को पुलिस की ओर से मिला है।

पता लगा है कि पत्र मिलने के बाद सीडब्ल्यूसी भी कार्रवाई के स्थान पर पुलिस द्वारा परिजनों द्वारा कार्रवाई नहीं चाहने संबंधी पत्र को लेकर भौंचक है।

जानकारी अनुसार अक्टूबर माह में एक नाबालिग(minor) को परिजन एक निजी अस्पताल में उपचार हेतु लाए थे। यहां परीक्षण के पश्चात महिला डाक्टर को शक हुआ कि नाबालिग से दुराचार हुआ है और नियमानुसार उन्होंने अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के साथ पुलिस को अपने स्तर से सूचना दी।

अब करीब एक माह से अधिक समय के बाद बाल कल्याण समिति को पुलिस की ओर से एक पत्र मिला है जिसमें पीड़िता के पिता व खुद पीड़िता द्वारा उसके साथ कोई गलत कार्य नहीं होने और कोई कार्रवाई नहीं चाहने संबंधी पत्रों के साथ अपनी रिपोर्ट भेजी है।

इधर पूछे जाने पर बाल कल्याण समिति की सदस्य नीलिमा भट्ट ने कहा कि पुलिस का एक पत्र मिला है। अब समिति नाबालिग (minor)के संरक्षण व सुरक्षा को देखते हुए अग्रिम कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि प्रकरण की जानकारी भी पत्र के माध्यम से मिली है। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इधर कानून के जानकार भी यह मान रहे हैं कि नाबालिग के साथ यौन अपराध हुआ हो, होने की संभावना हो या अपराध का अंदेशा हो तब भी पीड़िता का संरक्षण बहुत जरूरी है, इस तरह कार्रवाई नहीं चाहने संबंधित पत्रों को आधार बनाया जाना इस कानून के उद्देश्यों पर कुठाराघात है।

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