असम और मिजोरम के बीच तनाव , दोनों राज्‍यों ने एक दूसरे पर जमीन कब्‍जाने का लगाया आरोप

आइजोल/हैलाकांडी। असम और मिजोरम के बीच सीमा विवार के चलते तनाव एकबार फि‍र बढ़ गया है। दोनों राज्यों के अधिकारियों ने एक-दूसरे की जमीन पर कब्‍जा…

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आइजोल/हैलाकांडी। असम और मिजोरम के बीच सीमा विवार के चलते तनाव एकबार फि‍र बढ़ गया है। दोनों राज्यों के अधिकारियों ने एक-दूसरे की जमीन पर कब्‍जा करने के आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम ने बुधवार को असम पर कोलासिब जिले में उसकी जमीन का अतिक्रमण करने का आरोप लगाया जिसके साथ दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सीमा विवाद और बढ़ गया है।

वहीं असम के अधिकारियों और विधायकों ने मिजोरम पर राज्‍य में हैलाकांडी में दस किलोमीटर भीतर संरचनाओं के निर्माण और सुपारी व केले के पौधे लगाने का आरोप लगाया है। यह विवाद ऐसे वक्‍त में सामने आया है जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि वह सभी सीमावर्ती राज्यों के साथ सीमा विवाद को खत्‍म करने के लिए समझौता करने के लिए काम कर रहे हैं।

वहीं कोलासिब जिले के पुलिस अधीक्षक वनलालफाका राल्ते (Vanlalfaka Ralte) ने कहा कि असम के हैलाकांडी जिले के उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में सौ से अधिक अधिकारी और पुलिसकर्मी मिजोरम के इलाके में घुस आए हैं और मंगलवार से वहां डेरा डाले हुए हैं। राल्‍ते ने कहा कि यह इलाका मिजोरम का है और असम के करीमगंज जिले की सीमा से लगे कोलासिब के वैरेंगते गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूर है।

कोलासिब जिले के पुलिस अधीक्षक वनलालफाका राल्ते (Vanlalfaka Ralte) के मुताबिक इस इलाके को स्थानीय स्तर पर ऐतलांग नदी के स्रोत के तौर पर जाना जाता है। अधिकारी ने कहा कि वैरेंगते के निवासी इस इलाके में खेती करते हैं। यह इलाका पुरातन समय से मिजोरम का हिस्सा है। राल्ते (Vanlalfaka Ralte) ने आरोप लगाया कि असम से कई जिला अधिकारी और पुलिसकर्मी मंगलवार को इलाके में पहुंचे और वहां जबरन कब्जा किया।

उल्‍लेखनीय है कि मिजोरम के तीन जिले (आइजोल, कोलासिब और ममित) और असम के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी जिले एक दूसरे से सटे हुए हैं। ये एक दूसरे के साथ लगभग 164.6 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सीमा विवाद पुराना है। दोनों राज्‍यों के बीच सीमा विवाद को खत्‍म करने के लिए सन 1995 के बाद से कई वार्ताएं हुई हैं लेकिन इनका कोई फायदा नहीं हुआ है।