SSJ University

State Foundation Day was also celebrated in SSJ University

अल्मोड़ा, 09 नवंबर 2020
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा में राज्य स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी, परिसर निदेशक प्रो. नीरज तिवारी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. जया उप्रेती ने दीप प्रज्ज्वलित कर शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।

इस दौरान संगीत विभाग की छात्राओं ने स्वागत गीत व राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्रों ने उत्तराखंड के संदर्भ में जन​कवि गिरीश चंद्र तिवाड़ी ‘गिर्दा’ के द्वारा लिखा गीत ‘उत्तराखंड मेरी मातृभूमि…. का गायन किया। हेमा अवस्थी ने मांगल गीत गाकर उत्तराखंड की संस्कृति को उजागर किया।

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एसएसजे विवि में स्वागत गीत प्रस्तुत करती संगीत विभाग की छात्राएं— फोटो उत्तरा न्यूज

बतौर मुख्य अतिथि ​विवि के कुलपति प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी ने राज्य आंदोलनकारियों व बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि हमारी सोच यदि सकारात्मक होगी तो हर कार्य संभव होंगे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इस राज्य के लिए अनेकों बलिदानियों का योगदान रहा है। हमे उनके स्वप्नों को साकार करने के लिए हृदय से कार्य करने होंगे। हमें चुनौतियों का सामना कर अवसर खोजने होंगे।

विभागों की स्थिति को लेकर कुलपति प्रो. भंडारी ने कहा कि मैंने कुछ विभागों में भ्रमण किया। जल्द ही विभागों में रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

परिसर निदेशक प्रो. नीरज तिवारी ने उपस्थित लोगों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देेते हुए कहा कि हमें उपलब्धियों से संतुष्ट होकर आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। सरकारों को दोष देने से काम नहीं चलेगा। हम सभी को प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में मुजफ्फरकांड जैसे अनेकों आंदोलन हुए हैं, उनसे सीख लेने की जरूरत है। शिक्षकों, कर्मियों और विद्यार्थियों को ईमानदारी से अपने अपने काम करने ही होंगे।

इस दौरान योग के शोधार्थी रजनीश पांडे, छात्रनेता दीपक तिवारी, मैत्रेयी लखचौर आदि संस्कृति और छात्रनेता आशीष पंत ने कहा कि उत्तराखंड में समस्याओं पर धरातल पर काम करने की जरूरत है और उन्होंने उत्तराखंड राज्य की समस्याओं पर बात रखी। एनसीसी की कैडेट हिमानी दीक्षा पांडे ने उत्तराखंड के विकास और पर्यटन की संभावनाओं पर बात रखी।

संचालन करते हुए गोष्ठी के संयोजक डॉ. नवीन भट्ट ने कहा कि इस विश्वविद्यालय को हर दृष्टिकोण से बेहतर बनाने के लिए लगन जरूरी है। कुलपति के निर्देशन में समस्या का समाधान होगा।

इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक सुशील कुमार जोशी, कुलानुशासक प्रो. अनिल यादव, प्रो. इला साह, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, प्रो. प्रवीण बिष्ट, प्रो. रुबीना अमान, प्रो. निर्मला पंत, प्रो. अरविंद सिंह अधिकारी, प्रो. शेखर जोशी, डॉ. संजीव आर्या, प्रो. सोनू द्विवेदी, प्रो. कौस्तुबानन्द पांडे, प्रो. अनिल जोशी, डॉ. प्रीति आर्या, डॉ. ममता पंत, डॉ. बचन लाल, डॉ. भाष्कर चौधरी, डॉ. ममता असवाल, डॉ. माया गोला, डॉ. प्रतिभा फुलोरिया, आस्था नेगी, ज्योति किरण, लल्लन सिंह, , प्रोफेसर हरीश जोशी, प्रोफेसर ज्योति जोशी प्रोफेसर बी सी तिवारी,,डॉ सबीहनाज, डॉ वंदना जोशी, प्रोफेसर विजया रानी ढोड़ीयाल ,डॉ मनोज बिष्ट, डॉ धनी आर्या, डॉ ललित चंद्र जोशी, डॉ देवेंद्र धामी, प्रमेश टम्टा, डॉ संदीप कुमार,विनीत कांडपाल, देवेंद्र पोखरिया, विपिन जोशी, आलोक वर्मा, कैलाश छिमवाल, त्रिलोक बिष्ट, दीवान राम, डॉ. पवन जोशी, डॉ. राम चन्द्र मौर्य, डॉ मुकेश सामंत,रजनीश जोशी, गिरीश अधिकारी, डॉ. ममता ध्यानी, डॉ. आशा शैली, डॉ. गौरव कर्नाटक, डॉ. विशाल कर्नाटक, डॉ. विजय बल्लभ, डॉ. तिलक राज जोशी, डॉ. बीसी चौहान, डॉ. दीपा कांडपाल, प्रो. नरेंद्र दत्त कांडपाल, डॉ. भुवन आर्या, पूरन कनवाल, सुरेंद्र बघरी आदि शिक्षक, छात्र और कर्मचारी आदि मौजूद थे।