Farmers Protests

Farmers Protests – Furore over the decision of the Delhi Government amid the farmers’ movement

किसान आंदोलन (Farmers Protests) के बीच दिल्ली सरकार के फैसले पर मचा बवाल सियासत भी तेज हो गई है। जहां भाजपा ने इस कदम को भाजपा सरकार द्वारा लागू किये गये कृषि बिलों का क्रेडिट लेने वाला फैसला बताया है तो कांग्रेस ने इसे किसानों के लिये डेथ वारंट बताया है। यह कानून ऐसे समय में आया है जब पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश,राजस्थान और कई राज्यों के किसानों ने इस कानून को खत्म करने के लिये दिल्ली के बार्डर पर घेराबंदी (Farmers Protests) शुरू कर दी है।

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protests) के बीच दिल्ली सरकार का एक बड़ा फैसला सामने आया है दरअसल दिल्ली सरकार ने एक कानून को अधिसूचित किया है, इस कानून के तहत अब दिल्ली के किसान मंडी के बाहर अपने फल, अनाज बेच सकेंगे।

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक किसान उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य 2020 की अधिसूचना जारी हुई थी तथा शेष दो कानूनों पर सरकार अभी विचार कर रही है।

दिल्ली में पहले से ही कृषि उत्पाद बाजार समिति कानून लागू है। इस एक्ट के तहत 2014 से ही मंडी के बाहर फल, सब्जी बेचने की सुविधा थी, नया कानून लागू होने से अब किसान अपनी दूसरी फसलें भी मंडी के बाहर बेच सकेंगे

इस कानून का प्रमुख असर अनाज पर पड़ेगा साथ ही इसमें मुर्गी पालन को भी जोड़ा गया है। इसके अलावा सरकार अन्य 2 कानूनों पर भी विचार कर रही है।


इस फैसले को सभी पार्टिया अपने अपने नजरिये से सही व गलत कह रही है। जहां आम आदमी पार्टी इसे केन्द्र सरकार के लागू कृषि बिलों से अलग बता रही है वही भाजपा ने इसे केन्द्र सरकार के ​कृषि बिल की नकल बताया है। सांसद मनोज तिवारी ने कहा है कि​ दिल्ली सरकार की यह अधिसूचना केन्द्र द्धारा लागू किये गये कृषि बिल की नकल है। कहा कि इस अधिसूचना के जरिये आम आदमी पार्टी किसानों को गुमराह कर कृषि कानूनों से होने वाले लाभ का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।


वही भाजपा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। दिल्ली सरकार की अधिसूचना के अनुसार मंडियों को हटाया नहीं गया है। और इस अधिसूचना से किसानों को बाहर कहीं भी सब्जी बेचने का अधिकार दिया गया है।

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दिल्ली सरकार की अधिसूचना पर कांग्रेस ने हैरानी जाहिर की है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि इससे आम आदमी पार्टी की असलियत लोगों के सामने आ रही है। एक ओर आम आदमी पार्टी किसान आंदोलन का समर्थन करने की बात कर रही है वही कृषि बिलों के खिलाफ चल रहे आंदोलन (Farmers Protests
) के बीच उसने यह अधिसूचना जारी कर ​​दिल्ली में किसानों के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर दिये है।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्धारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले 7 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन (Farmers Protests) पर है। केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर​ दि रात धरना दे रहे है। किसान आंदोलन को हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। और ट्रांसपोर्ट यूनियन, सब्जी मंडी ऐशासियेशन भी उनके समर्थन में है। हरियाणा की फल, सब्जी एशोसियेशन ने भी आंदोलन को पूरा समर्थन दिया है। 113 मंडियों के व्यापारियों ने आंदोलन के समर्थन में दिल्ली जाने की बात कही है। वही चालक एशोसियेशन ने भी ​किसान आंदोलन (Farmers Protests)को समर्थन देने का ऐलान किया है।

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हरियाणा की 40 से ज्यादा खाप पंचायतें भी किसान आंदोलन (Farmers Protests)के समर्थन में आई है और उम्मीद जताई जा रही है कि और खाप पंचायतें भी ऐसा ऐलान कर सकती है। हरियाणा सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक सोमवीर सांगवान ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। हरियाणा के जींद जिले में 40 खापों की महापंचायत में हरियाणा सरकार को गिराने के लिए मुहिम चलाने का फैसला लिया गया। गौरतलब है ​हरियाणा में भाजपा सरकार को अपने दम पर बहुमत नही है। हरियाणा की खट्टर सरकार जेजेपी और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही है।

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महापंचायत मे खाप नेताओं ने कहा कि जिन विधायकों ने सरकार को समर्थन दिया हुआ है उनके ऊपर समर्थन वापिस लेने के दबाव बनाने का प्रयास होगा। और हर खाप समर्थन दे रहे विधायकों से मिलेगी और पहले शाति से विधायकों से अपील करेंगे और ना मामने की सूरत में ऐसे विधायकों को गांवो में घुसने नही दिया जायेगा।

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